इस बीच, विश्वविद्यालयों द्वारा किए जा रहे इन बदलावों ने शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है कि आने वाले समय में सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में भारत का इस्तेमाल और बढ़ सकता है.