MP News: सीआईडी ने यह एडवाइजरी पुलिस कमिश्नर कार्यालयों, एसटीएफ, नारकोटिक्स और साइबर सेल सहित सभी प्रमुख इकाइयों को भेजी है. निर्देशों में कहा गया है कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी समझ में आने वाली भाषा में गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताए जाएं.
Bhopal News: जानकार बताते हैं कि आम तौर पर 31 मार्च से ठीक पहले स्टॉक क्लियरेंस के लिए सीमित छूट दी जाती है, लेकिन इस बार दो महीने पहले ही भारी डिस्काउंट शुरू हो गया. भोपाल में एक बड़े समूह द्वारा 50 प्रतिशत तक छूट दिए जाने की चर्चा है.
MP News: राजस्थान और ओडिशा ने एमपी के इस मॉडल को लागू करने से पहले तकनीकी प्रक्रिया, सॉफ्टवेयर डिजाइन और सैंपल ट्रैकिंग सिस्टम की जानकारी मांगी है. यदि यह मॉडल वहां भी लागू होता है, तो निर्माण गुणवत्ता की निगरानी में डिजिटल पारदर्शिता का नया मानक स्थापित हो सकता है.
MP News: जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि कई इलाकों में नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीजों के कारण अंकुरण ही नहीं हुआ. किसानों ने शिकायत की कि बोवनी के बाद फसल जमीन से निकली ही नहीं, जिससे उन्हें दोबारा बुवाई करनी पड़ी.
15 फरवरी को राज्यपाल मंगुभाई पटेल से भी प्रतिनिधियों की भेंट प्रस्तावित है. इन उच्चस्तरीय मुलाकातों को भाजपा संगठन राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहा है कि पार्टी शासित राज्यों के ‘गवर्नेंस मॉडल’ को राष्ट्रीय स्तर पर साझा कर एक वैकल्पिक विकास नैरेटिव गढ़ना चाहती है.
ल्लभ भवन में बहुस्तरीय सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, पास सिस्टम और हर गेट पर सशस्त्र बलों की तैनाती रहती है. सब-इंस्पेक्टर रैंक तक के अधिकारी 24 घंटे ड्यूटी पर मौजूद रहते हैं. इसके बावजूद फर्जी अधिकारी का प्रवेश करना सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है.
योजना के तहत पंजीयन के लिए उपभोक्ता portal.mpcz.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा “उपाय” मोबाइल ऐप, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी सुविधा उपलब्ध है.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों की मध्यस्थता के बाद तन्खा ने सर्वोच्च न्यायालय में मानहानि वाद वापस लेने का निर्णय लिया. इसके बाद दोनों नेताओं की यह पहली सार्वजनिक मुलाकात मानी जा रही है.
सुरक्षा कारणों से इस बार मंत्रियों और विधायकों के अंगरक्षकों को विधानसभा भवन में प्रवेश नहीं मिलेगा. उन्हें केवल पार्किंग स्थल स्थित द्वार क्रमांक तीन तक ही अनुमति होगी.
जांच एजेंसी का कहना है कि कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए संतोष वर्मा के हस्ताक्षर के नमूने जरूरी हैं. गिरफ्तारी के समय हस्ताक्षर लिए गए थे, लेकिन संबंधित दस्तावेज फिलहाल हाई कोर्ट की प्रक्रिया में हैं. ऐसे में पुलिस दोबारा नमूने लेना चाहती है, लेकिन आरोप है कि अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे.