ट्विशा के वकील ने कहा, 'यह जांच का विषय है कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत के बाद 12 और 13 मई को सभी लोगों को कॉल किया. लेकिन जिसकी बेटी थी, उसी के परिवार को कॉल नहीं किया.'
MP News: इस पूरे खेल में कमीशन का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. जिसमें आधी रकम दलालों और एंबुलेंस कर्मियों तक पहुंचती है, जबकि बाकी निजी अस्पताल संचालकों को पहुंचायी जा रही है. कई गरीब परिवार अपने मरीज की जान बचाने के लिए कर्ज लेने, गहने बेचने या मकान तक गिरवी रखने को मजबूर हो जाते हैं
MP News: मामले में जल संसाधन विभाग का कहना है कि भू-अर्जन के लिए वर्ष 2017 में ही 90 करोड़ रुपये प्रशासन के खाते में जमा कराए जा चुके हैं. इसके बावजूद किसानों को भुगतान क्यों नहीं हुआ. इसका जवाब भू-अर्जन शाखा ही दे सकती है
CM Mohan Yadav Reaction: सीएम मोहन यादव ने रिएक्शन देते हुए कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के मुंह से ऐसी भाषा समूचे लोकतंत्र का अपमान है. लोकतंत्र में दो बड़े पद हैं एक पक्ष और दूसरा विपक्ष. पक्ष का पद प्रधानमंत्री का होता है.
MP News: वीडियो में वही लोडर गांव में गोबर के घूरे भरते समय पुलिस द्वारा जब्त किया जाता दिखाई दे रहा है. ऐसे में लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर पुलिस ने मौके की तस्वीरें जारी क्यों नहीं कीं और थाने पर खींचे फोटो से क्या साबित करना चाहती है.
थाना इंचार्ज का कहना है कि युवक ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया गया था. जिसके कारण उस पर कार्रवाई की गई. इस दौरान युवक की बहन ने पुलिस के काम में काफी देर तक व्यवधान उत्पन्न किया और पुलिस की गाड़ी के बोनट पर काफी देर तक बैठी रही.
MP News: सीएम को जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है. यही वजह है कि पहले तय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहता है. इसके साथ ही सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी भी निर्धारित रहती है. इस तरह बिना अनुमति या अचानक कोई वाहन कारकेड में आ जाता है तो इसे सुरक्षा में चूक माना जाता है.
चंदन की लकड़ी की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. लेकिन अब तस्कर और चोर सरकारी बंगलों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. ऐसे में सरकारी परिसरों से पेड़ों का चोरी होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.
हर्षा रिछारिया ने कहा, 'जो इंसान मौत को गले लगाता है, वह उससे पहले हर दिन मर रहा होता है, हर दिन घुट रहा होता है. फिर आखिरी में जान दे देता है. मौत से पहले पीड़िता हर दिन घुटती है. फिर मौत के बाद परिजनों को न्याय के लिए भटकना पड़ता है. न्याय के लिए माता-पिता को दूसरी जंग लड़नी पड़ती है.'
MP News: भोपाल नगर निगम ने पिछले पांच सालों में 8.56 करोड़ रुपये कुत्तों की नसबंदी और उनकी वैक्सीनेशन पर खर्च किए. इसके बावजूद हर रोज डॉग बाइट के 81 मामले आ रहे हैं. रोजाना 15 शिकायतें नगर निगम पहुंच रही है. कुत्ते सबसे ज्यादा बुजुर्गों और बच्चों को निशाना बना रहे हैं.