नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूर्ण मुआवजा नहीं दिया गया है और मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं.
मध्य प्रदेश कर्मचारी अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन यह नियम केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. अधिकारियों की भी मॉनिटरिंग होनी चाहिए.
Bhopal News: मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लाए गए चीतों को लेकर एक बार फिर खर्च और प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. खबर है कि कूनो नेशनल पार्क में चीते 1 करोड़ के बकरे लंच और डिनर में खा गए हैं.
MP News: अधिकारियों के अनुसार दुकानों का आवंटन 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि के लिए किया जाएगा. जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला निष्पादन समिति पूरी ई-टेंडर प्रक्रिया की निगरानी करेगी.
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में लिखित जवाब प्रस्तुत किया. जवाब में बताया गया कि विधायक द्वारा वर्ष 2025 में सात पत्र लिखे गए थे, जिनमें विभिन्न मामलों की जानकारी दी गई थी.
Bhopal News: मध्यप्रदेश के वन महकमे में नए वन बल प्रमुख (PCCF) की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. वन्य प्राणी एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी शुभरंजन सेन को वन बल प्रमुख बनाए जाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है. दुबे ने अपने […]
ग्वालियर और कटनी जिलों में पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है.
ईओडब्ल्यू को 12 जून 2019 को भोपाल निवासी दीपक भावसार से लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी. इसमें बताया गया था कि भोपाल स्थित तीन बहुमूल्य संपत्तियों को गिरवी रखकर लगभग 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट प्राप्त की और राशि का दुरुपयोग किया.
शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल की गई है. वर्ष 2025 में विभिन्न कक्षाओं में 1007 बंदियों ने अध्ययन किया, 550 बंदी हिंदी राष्ट्रभाषा परीक्षा में शामिल हुए. 6,646 बंदियों को साक्षर बनाया गया. सरकार का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों का पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है.
पिछले तीन साल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट पर सरकारी खजाने से कुल 201 करोड़ 85 लाख 31 हजार रुपये खर्च किए गए. लेकिन इससे न तो रोजगार और न ही निवेश हुआ.